हमारे बारे में

हम सैदपुर, बुलंदशहर स्थित दादी धाम के पुजारी हैं, जो सिरोही जाट गोत्र की आस्था का केंद्र है।
यहाँ की दादी शीषकौर की समाधि पर हर नवरात्रि में मेला लगता है, और यह स्थान अब एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बन चुका है।

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+ 50 वर्षों से आध्यात्मिक सेवा में समर्पित +

हम प्रदान करते हैं भक्तिमय प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रम

दादी धाम, सैदपुर (बुलंदशहर) एक पवित्र स्थल है जो दादी माँ को समर्पित है। यह स्थान सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र है। यहाँ भक्तजन पूजा, भजन, और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

हमारा मंदिर

दादी धाम एक धार्मिक स्थल है जहाँ विशेष अवसरों पर भंडारे, कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। यह मंदिर सिरोही जाट समुदाय सहित सभी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है।

सेवाएँ

मंदिर में नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, भजन संध्या, पर्वों पर विशेष पूजा, और सामाजिक सहायता कार्यक्रमों का आयोजन होता है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं।

दादी धाम, सैदपुर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो सिरोही जाट समुदाय की कुलदेवी दादी माता को समर्पित है। यह धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक भी है।

सैदपुर गांव की स्थापना सिरोही जाटों द्वारा की गई थी, और यह वरिक खाप का मुख्य गांव रहा है। गांव की आबादी लगभग 50,000 है, जिसमें से लगभग 90% सिरोही जाट हैं। यह गांव अपने वीर सैनिकों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक में अपनी बहादुरी का परिचय दिया है। 1965 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं एक शहीद की अस्थियां लेकर सैदपुर आई थीं, जो इस गांव के प्रति राष्ट्रीय सम्मान को दर्शाता है।

दादी धाम में प्रतिवर्ष विशेष मेले और धार्मिक आयोजन होते हैं, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं। यह धाम न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

सैदपुर, बुलंदशहर का दादी धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक भी है। यह मंदिर सिरोही जाट गोत्र की जाट बिरादरी के लिए विशेष आस्था का केंद्र है, जो इसे अपनी दादी के रूप में पूजते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, लगभग 500 वर्ष पूर्व, दादी शीषकौर नामक एक तपस्विनी महिला ने अपने दिवंगत पति की याद में यहाँ समाधि ली थी। तब से यह स्थान 'दादी का थान' के नाम से प्रसिद्ध है। गांववाले इसे अपनी आस्था और श्रद्धा का केंद्र मानते हैं, और विशेष अवसरों पर यहाँ पूजा-अर्चना करने आते हैं।

दादी धाम का धार्मिक महत्व समय के साथ बढ़ा है। यह स्थान अब एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है, जहाँ भव्य मंदिर, विश्राम गृह, और ओपन जिम जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। यहाँ हर नवरात्रि में मेला लगता है, जिसमें दूर-दराज से लोग आते हैं।

दादी धाम की स्थापना और इसके महत्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप निम्नलिखित वीडियो देख सकते हैं: